भूमि / पृथ्वी सूक्त (१२.१.१) वैदिक मंत्र
ॐ सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति । सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु ॥
पर्यावरण-संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन एवं लौकिक ऐश्वर्य की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पर्यावरण-संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन एवं लौकिक ऐश्वर्य की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
पर्यावरण-संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन एवं लौकिक ऐश्वर्य की प्राप्ति
जाप विधि
प्रातःकाल भूमि पर पैर रखने से पूर्व भूमि को स्पर्श करते हुए मानसिक जप। वास्तु-पूजन या कृषि-कार्य के आरम्भ में विनियोग।
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ॐ श्री बालपरमेश्वर्यै नमः
tantrik mantraॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्लीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
navgrah mantraॐ ह्सौः श्रीं आं ग्रहाधिराजाय आदित्याय स्वाहा॥
naam mantraगुह