ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भूमि / पृथ्वी सूक्त (१२.१.१)

भूमि / पृथ्वी सूक्त (१२.१.१) वैदिक मंत्र

ॐ सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति । सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु ॥

पर्यावरण-संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन एवं लौकिक ऐश्वर्य की प्राप्ति।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

पर्यावरण-संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन एवं लौकिक ऐश्वर्य की प्राप्ति।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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पर्यावरण-संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन एवं लौकिक ऐश्वर्य की प्राप्ति

जाप विधि

प्रातःकाल भूमि पर पैर रखने से पूर्व भूमि को स्पर्श करते हुए मानसिक जप। वास्तु-पूजन या कृषि-कार्य के आरम्भ में विनियोग।

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