सर्वदेव / शान्ति पाठ (३६.१७) वैदिक मंत्र
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वं शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥
आधिभौतिक, आधिदैविक एवं आध्यात्मिक त्रितापों से मुक्ति और चराचर जगत में सार्वभौमिक शांति की स्थापना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आधिभौतिक, आधिदैविक एवं आध्यात्मिक त्रितापों से मुक्ति और चराचर जगत में सार्वभौमिक शांति की स्थापना।
इस मंत्र से क्या होगा?
आधिभौतिक, आधिदैविक एवं आध्यात्मिक त्रितापों से मुक्ति और चराचर जगत में सार्वभौमिक शांति की स्थापना
जाप विधि
प्रत्येक प्रकार के यज्ञ, संध्या, ध्यान, योगाभ्यास अथवा सत्संग के समापन पर हाथ जोड़कर शांत भाव से पाठ।
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गोविन्द राधे राधे श्याम गोपाल राधे राधे
ugra mantraओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा
sabar mantraओम कलीम कामाख्या नजर तोड़े बंधन तोड़े बाधा तोड़े शत्रु की बुद्धि तोड़े ना तोड़े तो उमानंद भैरव की आन 17
naam mantraकुज
jap mantraश्री राम दूताय नम:
navgrah mantraॐ गजध्वजाय विद्महे शुकहस्ताय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्।