भगवान शिव नाम मंत्र
त्रिपुरारी
तीनों तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) एवं त्रिगुणों (सत्त्व, रज, तम) से पूर्णतः पार जाना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तीनों तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) एवं त्रिगुणों (सत्त्व, रज, तम) से पूर्णतः पार जाना।
इस मंत्र से क्या होगा?
तीनों तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) एवं त्रिगुणों (सत्त्व, रज, तम) से पूर्णतः पार जाना
जाप विधि
रुद्राक्ष माला पर ध्यान मग्न होकर, तीनों लोकों को नश्वर मानते हुए।
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काल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
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