भगवान शिव नाम मंत्र
भीमाशंकर
भयंकर और पुराने शारीरिक रोगों से मुक्ति एवं अपार शारीरिक बल की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भयंकर और पुराने शारीरिक रोगों से मुक्ति एवं अपार शारीरिक बल की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
भयंकर और पुराने शारीरिक रोगों से मुक्ति एवं अपार शारीरिक बल की प्राप्ति
जाप विधि
रुद्राक्ष की माला पर १०८ बार, व्याधि के स्थान पर हाथ रखकर।
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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
siddh mantraॐ श्रीं महादेव्यै सरस्वत्यै स्वाहा
ugra mantraॐ नमो विपरीत-प्रत्यंगिरायै सहस्त्रानेक-कार्य-लोचनायै कोटि-विद्युज्जिह्वायै महा-व्याव्यापिन्यै संहार-रुपायै जन्म-शान्ति-कारिण्यै। मम स-परिवारकस्य भावि-भूत-भवच्छत्रून् स-दाराऽपत्यान् संहारय संहारय, महा-प्रभावं दर्शय दर्शय, हिलि हिलि, किलि किलि, मिलि मिलि, चिलि चिलि, भूरि भूरि, विद्युज्जिह्वे, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, ध्वंसय ध्वंसय, प्रध्वंसय प्रध्वंसय, ग्रासय ग्रासय, पिब पिब, नाशय नाशय, त्रासय त्रासय, वित्रासय वित्रासय, मारय मारय, विमारय विमारय, भ्रामय भ्रामय, विभ्रामय विभ्रामय, द्रावय द्रावय, विद्रावय विद्रावय हूं हूं फट् स्वाहा।।
navgrah mantraॐ वृषभध्वजाय विद्महे घृणिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
bhakti mantraराधे कृष्ण राधे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण राधे राधे
tantrik mantraॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा