भगवान गणेश (शुभ लाभ मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वरवर्दा सर्वजन्म में वशमान्यै नमः
व्यवसाय व गृहस्थ जीवन में शुभता तथा लाभ की वृद्धि, अपार सौभाग्य, एवं सर्वजन अनुकूलन (वशीकरण) की प्राप्ति 1।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
व्यवसाय व गृहस्थ जीवन में शुभता तथा लाभ की वृद्धि, अपार सौभाग्य, एवं सर्वजन अनुकूलन (वशीकरण) की प्राप्ति 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यवसाय व गृहस्थ जीवन में शुभता तथा लाभ की वृद्धि, अपार सौभाग्य, एवं सर्वजन अनुकूलन (वशीकरण) की प्राप्ति
जाप विधि
बुधवार या चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित कर लाल चंदन की माला से १०८ बार जप करें 1।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
dhyan mantraसोऽहम्
vaidik mantraॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वं शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥
tantrik mantraॐ हं सं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः
gyan mantraयोगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः । स्कंदः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः ॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रोधारिश्च षडाननः ॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः । सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥ शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वांछितार्थप्रदर्शनः ॥ अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीति यः पठेत् । प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पतिर्भवेत् ॥ महामंत्रमयानीति मम नामानुकीर्तनात् । महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥
navgrah mantraॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।