एकादश रुद्र (शम्भु रुद्र) मूल मंत्र
ॐ गं ग्लौं श्रौं ग्लौं गं ॐ नमः
आत्मिक शांति, परम ज्ञान की प्राप्ति, चेतना का विस्तार तथा शिव सायुज्य की प्रत्यक्ष अनुभूति 7।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आत्मिक शांति, परम ज्ञान की प्राप्ति, चेतना का विस्तार तथा शिव सायुज्य की प्रत्यक्ष अनुभूति 7।
इस मंत्र से क्या होगा?
आत्मिक शांति, परम ज्ञान की प्राप्ति, चेतना का विस्तार तथा शिव सायुज्य की प्रत्यक्ष अनुभूति
जाप विधि
प्रातःकाल स्नानादि के पश्चात् शांत चित्त से रुद्राक्ष की माला पर १०८ बार जप करें 7।
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navgrah mantraॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात्।
dhyan mantraअतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
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kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34