मंगल मूल मंत्र
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः (सामान्य मूल: ॐ भौमाय नमः)
मांगलिक दोष की शांति, दुर्घटनाओं से बचाव, ऋण से मुक्ति, साहस एवं पराक्रम में वृद्धि तथा संपत्ति विवादों का समाधान 47।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
मांगलिक दोष की शांति, दुर्घटनाओं से बचाव, ऋण से मुक्ति, साहस एवं पराक्रम में वृद्धि तथा संपत्ति विवादों का समाधान 47।
इस मंत्र से क्या होगा?
मांगलिक दोष की शांति, दुर्घटनाओं से बचाव, ऋण से मुक्ति, साहस एवं पराक्रम में वृद्धि तथा संपत्ति विवादों का समाधान
जाप विधि
मंगलवार को प्रातःकाल रक्त वस्त्र धारण कर लाल आसन पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके मूंगा या लाल चंदन की माला से जप करें। अनुष्ठान हेतु ४० दिन में १०,००० की संख्या पूर्ण करें 47।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ उग्र नरसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ॥
ugra mantraअं ङं ञं णं नं मं
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
bhakti mantraश्री राम जय राम जय जय राम
navgrah mantraअर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम्। सिंहिकागर्भ सम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥