निर्ऋति मूल मंत्र
ॐ निर्ऋतये नमः
दुर्भाग्य व अलक्ष्मी का नाश, भवन के नैऋत्य कोण के प्रबल वास्तु दोषों का शमन एवं अदृश्य बुरी शक्तियों से पूर्ण रक्षा 59।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
दुर्भाग्य व अलक्ष्मी का नाश, भवन के नैऋत्य कोण के प्रबल वास्तु दोषों का शमन एवं अदृश्य बुरी शक्तियों से पूर्ण रक्षा 59।
इस मंत्र से क्या होगा?
दुर्भाग्य व अलक्ष्मी का नाश, भवन के नैऋत्य कोण के प्रबल वास्तु दोषों का शमन एवं अदृश्य बुरी शक्तियों से पूर्ण रक्षा
जाप विधि
दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) की ओर मुख करके रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से रात्रि के समय जप करें 59।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kaamya mantraशूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥
navgrah mantraॐ भृगुसुताय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
beej mantraक्ष्रौं
stotra mantraअतृप्ताय च वै नमः ज्ञान चक्षु नमस्ते। कश्यपासूनवे तुष्टोदासि वैराज्यम रुष्टो हरसि तत्क्षणात। 47