बटुक भैरव (आपदुद्धारक मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय
जीवन में अचानक आने वाली विपत्तियों का त्वरित नाश, घोर संकटों से मुक्ति, कलह का शमन एवं साधक की अकाल मृत्यु से पूर्ण रक्षा 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन में अचानक आने वाली विपत्तियों का त्वरित नाश, घोर संकटों से मुक्ति, कलह का शमन एवं साधक की अकाल मृत्यु से पूर्ण रक्षा 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में अचानक आने वाली विपत्तियों का त्वरित नाश, घोर संकटों से मुक्ति, कलह का शमन एवं साधक की अकाल मृत्यु से पूर्ण रक्षा
जाप विधि
रात्रि काल (विशेषकर रात ९:०० से १२:०० बजे के मध्य) में काले या लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष माला से जप किया जाना चाहिए। भैरव यंत्र के समक्ष सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करना अत्यंत फलदायी माना गया है 8।
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naam mantraवज्रपाणि
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