निराकार परब्रह्म (महावाक्य) ध्यान मंत्र
अहं ब्रह्मास्मि
अज्ञान और देह-अभिमान को मिटाकर अतिचेतन अवस्था में प्रवेश करना और स्वयं के भीतर छिपी शुद्ध दिव्यता को जाग्रत करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
अज्ञान और देह-अभिमान को मिटाकर अतिचेतन अवस्था में प्रवेश करना और स्वयं के भीतर छिपी शुद्ध दिव्यता को जाग्रत करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान और देह-अभिमान को मिटाकर अतिचेतन अवस्था में प्रवेश करना और स्वयं के भीतर छिपी शुद्ध दिव्यता को जाग्रत करना
जाप विधि
एकांत स्थान पर चौगुने कंबल के आसन पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। पंचकोशों (शरीर, प्राण, मन आदि) से अपनी पहचान को हटाते हुए स्वयं को अनंत, अमर और शुद्ध चेतन रूप में अनुभव कर इसका मानसिक जप करें।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9
navgrah mantraॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।
tantrik mantraॐ अं अणिमायै नमः स्वाहा
stotra mantraस्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् । गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः ॥ 31
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ॐ नमो भगवते स्वर्णाकर्षण भैरवाय हिरण्यं दापय दापय श्रीं ह्रीं क्लीं स्वाहा
gyan mantraयां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥