ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
निराकार परब्रह्म (महावाक्य)

निराकार परब्रह्म (महावाक्य) ध्यान मंत्र

अहं ब्रह्मास्मि

अज्ञान और देह-अभिमान को मिटाकर अतिचेतन अवस्था में प्रवेश करना और स्वयं के भीतर छिपी शुद्ध दिव्यता को जाग्रत करना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अज्ञान और देह-अभिमान को मिटाकर अतिचेतन अवस्था में प्रवेश करना और स्वयं के भीतर छिपी शुद्ध दिव्यता को जाग्रत करना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अज्ञान और देह-अभिमान को मिटाकर अतिचेतन अवस्था में प्रवेश करना और स्वयं के भीतर छिपी शुद्ध दिव्यता को जाग्रत करना

जाप विधि

एकांत स्थान पर चौगुने कंबल के आसन पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। पंचकोशों (शरीर, प्राण, मन आदि) से अपनी पहचान को हटाते हुए स्वयं को अनंत, अमर और शुद्ध चेतन रूप में अनुभव कर इसका मानसिक जप करें।

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