स्वर्णाकर्षण भैरव मूल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ॐ नमो भगवते स्वर्णाकर्षण भैरवाय हिरण्यं दापय दापय श्रीं ह्रीं क्लीं स्वाहा
दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन
जाप विधि
उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) की ओर मुख करके स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से प्रतिदिन १०८ बार जप करना चाहिए। इसे पूर्ण सात्विकता के साथ संपन्न किया जाता है 8।
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ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं जूं ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॐ स्वः भुवः भूः ॐ जूं ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ।
gyan mantraआ मां मेधा सुरभिर्विश्वरुपा हिरण्यवर्णा जगती जगम्या । ऊर्जस्वती पयसा पिन्वमाना सा मां मेधा सुप्रतीका जुषन्ताम् ॥
jap mantraॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
sabar mantraॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9
beej mantraहं
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥