स्वर्णाकर्षण भैरव मूल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ॐ नमो भगवते स्वर्णाकर्षण भैरवाय हिरण्यं दापय दापय श्रीं ह्रीं क्लीं स्वाहा
दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन
जाप विधि
उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) की ओर मुख करके स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से प्रतिदिन १०८ बार जप करना चाहिए। इसे पूर्ण सात्विकता के साथ संपन्न किया जाता है 8।
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stotra mantraभूः पादौ यस्य नाभिर्वियदसुरनिलश्चन्द्र सूर्यौ च नेत्रे कर्णावाशाः शिरो द्यौर्मुखमपि दहनो यस्य वास्तेयमब्धिः। अन्तःस्थं यस्य विश्वं सुरनरखगगोभोगिगन्धर्वदैत्यैः चित्रं रंरम्यते तं त्रिभुवन वपुषं विष्णुमीशं नमामि ॥ 10
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