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उद्देश्य अनुसार मंत्र
स्वर्णाकर्षण भैरव

स्वर्णाकर्षण भैरव मूल मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ॐ नमो भगवते स्वर्णाकर्षण भैरवाय हिरण्यं दापय दापय श्रीं ह्रीं क्लीं स्वाहा

दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन 8।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारमूल मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन 8।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन

जाप विधि

उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) की ओर मुख करके स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से प्रतिदिन १०८ बार जप करना चाहिए। इसे पूर्ण सात्विकता के साथ संपन्न किया जाता है 8।

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