काल भैरव मूल मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रीमे ह्रौं क्षं क्षेत्रपालाय काल भैरवाय नमः
तंत्र-मंत्र व काले जादू की बाधाओं का नाश, अवांछित दुष्ट शक्तियों से क्षेत्र व देह की रक्षा एवं समय (काल) के दुष्प्रभाव से पूर्ण मुक्ति 9।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तंत्र-मंत्र व काले जादू की बाधाओं का नाश, अवांछित दुष्ट शक्तियों से क्षेत्र व देह की रक्षा एवं समय (काल) के दुष्प्रभाव से पूर्ण मुक्ति 9।
इस मंत्र से क्या होगा?
तंत्र-मंत्र व काले जादू की बाधाओं का नाश, अवांछित दुष्ट शक्तियों से क्षेत्र व देह की रक्षा एवं समय (काल) के दुष्प्रभाव से पूर्ण मुक्ति
जाप विधि
भैरवाष्टमी या कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रुद्राक्ष माला से न्यूनतम १०८ बार जप करें। काल भैरव यंत्र स्थापित कर पूजन के पश्चात् यह जप अधिक प्रभावी होता है 9।
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sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
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