ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
सूर्य

सूर्य मूल मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (सामान्य मूल: ॐ सूर्याय नमः)

कुण्डली में सूर्य के अशुभ प्रभावों की शांति, स्वास्थ्य, तेज, यश, सामाजिक व प्रशासनिक प्रतिष्ठा, तथा नेत्र व हृदय रोगों का निवारण 47।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारमूल मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

कुण्डली में सूर्य के अशुभ प्रभावों की शांति, स्वास्थ्य, तेज, यश, सामाजिक व प्रशासनिक प्रतिष्ठा, तथा नेत्र व हृदय रोगों का निवारण 47।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

कुण्डली में सूर्य के अशुभ प्रभावों की शांति, स्वास्थ्य, तेज, यश, सामाजिक व प्रशासनिक प्रतिष्ठा, तथा नेत्र व हृदय रोगों का निवारण

जाप विधि

प्रातःकाल सूर्योदय (ब्रह्म मुहूर्त) के समय तांबे के पात्र से अर्घ्य देने के पश्चात् लाल आसन पर बैठकर लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से पूर्व की ओर मुख करके जप करें। यदि अनुष्ठान कर रहे हैं तो ४० दिनों के भीतर ७,००० जप पूर्ण करें 47।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

stotra mantra

सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: । नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: । कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥ एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: । 33

vaidik mantra

ॐ मेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजौ ॥

shanti mantra

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

naam mantra

शुक्र

navgrah mantra

ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस ऋतुप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।

tantrik mantra

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौः जगत्प्रसूत्यै नमः