भगवान कार्तिकेय (तांत्रिक बीज युक्त मंत्र) मूल मंत्र
ॐ सौं शरवणभवाय श्रीं ह्रीं क्लीं क्लौं सौं नमः
सभी प्रकार के भयों का शमन, शत्रुओं पर अजेय विजय, आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) एवं कालसर्प दोष से राहत 45।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सभी प्रकार के भयों का शमन, शत्रुओं पर अजेय विजय, आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) एवं कालसर्प दोष से राहत 45।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी प्रकार के भयों का शमन, शत्रुओं पर अजेय विजय, आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) एवं कालसर्प दोष से राहत
जाप विधि
कार्तिकेय यंत्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित कर रुद्राक्ष की माला से निष्ठापूर्वक १०८ बार जप करें। मोक्ष प्राप्ति हेतु इसे अत्यधिक संख्या (एक करोड़ बार) जपने का विधान वर्णित है 46।
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ॐ ह्रीं सरस्वत्यै नमः
naam mantraबुध
sabar mantraरक्षपाल आठवा दंड क्षेत्रपाल भैरव हाथ भर खप्पर तेल सिंदूर रक्षपाल येता अष्ट भैरव सदा रहो कृपाल दंड हमारा पिंड का प्राण वज्र हो काया कर रक्षा काली का पूत आवे दंड जावे दंड सो काल भागे 12 कोस काला दंड शीर कंटक का फोड़ हमको रख दुष्ट को पक ऐता भैरव दंड मंत्र संपूर्ण भया श्री नाथ जी गुरु जी को आदेश आदेश सत्य नमो आदेश गुरु जी को आदेश ओम गुरु 10
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे श्मशान कालिकायै सर्व बाधा निवारणाय सर्व शत्रु संहारणाय मम रक्षां कुरु कुरु स्वाहा
siddh mantraॐ ऐं क्लीं सौः। क ए ल ह ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। क स क ह ल ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। स क ल ह्रीं । सौः क्लीं ऐं ॐ॥
bhakti mantraनीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः