कूर्म अवतार मूल मंत्र
ॐ कूर्माय नमः
जीवन में अचल स्थायित्व एवं संतुलन की प्राप्ति, भवन निर्माण से संबंधित कार्यों में सफलता एवं दीर्घायु की प्राप्ति 15।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन में अचल स्थायित्व एवं संतुलन की प्राप्ति, भवन निर्माण से संबंधित कार्यों में सफलता एवं दीर्घायु की प्राप्ति 15।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में अचल स्थायित्व एवं संतुलन की प्राप्ति, भवन निर्माण से संबंधित कार्यों में सफलता एवं दीर्घायु की प्राप्ति
जाप विधि
पीले वस्त्र धारण कर स्थिर आसन पर बैठकर तुलसी या स्फटिक की माला से ४५ दिनों तक नित्य १०८ बार जप करने का विधान है 15।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ गण गणपतये नमः
kavach mantraनासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31
beej mantraब्रौं
ugra mantraॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं ॐ
dhyan mantraध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
stotra mantraमहालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् । 29