ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
माता लक्ष्मी / कनकधारा स्तोत्र (शंकराचार्य कृत)

माता लक्ष्मी / कनकधारा स्तोत्र (शंकराचार्य कृत) स्तोत्र मंत्र

कमले कमलाक्ष वल्लभे त्वं करुणा पूर तरङ्गितैरपाङ्गैः । अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥ 26

स्वर्ण के समान समृद्धि व धन का प्रवाह, आर्थिक संकट का निवारण तथा आत्मिक व मानसिक शांति 25।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तोत्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

स्वर्ण के समान समृद्धि व धन का प्रवाह, आर्थिक संकट का निवारण तथा आत्मिक व मानसिक शांति 25।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

स्वर्ण के समान समृद्धि व धन का प्रवाह, आर्थिक संकट का निवारण तथा आत्मिक व मानसिक शांति

जाप विधि

माता लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर 5 या 11 बार पाठ करें। शुक्रवार की रात 9 से 11 बजे के मध्य किया गया पाठ विशेष फलदायी होता है 25।

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ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34

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