माता लक्ष्मी / कनकधारा स्तोत्र (शंकराचार्य कृत) स्तोत्र मंत्र
कमले कमलाक्ष वल्लभे त्वं करुणा पूर तरङ्गितैरपाङ्गैः । अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥ 26
स्वर्ण के समान समृद्धि व धन का प्रवाह, आर्थिक संकट का निवारण तथा आत्मिक व मानसिक शांति 25।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
स्वर्ण के समान समृद्धि व धन का प्रवाह, आर्थिक संकट का निवारण तथा आत्मिक व मानसिक शांति 25।
इस मंत्र से क्या होगा?
स्वर्ण के समान समृद्धि व धन का प्रवाह, आर्थिक संकट का निवारण तथा आत्मिक व मानसिक शांति
जाप विधि
माता लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर 5 या 11 बार पाठ करें। शुक्रवार की रात 9 से 11 बजे के मध्य किया गया पाठ विशेष फलदायी होता है 25।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
beej mantraभ्रीं
navgrah mantraॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा।।
mool mantraॐ रुद्राय रोगनाशाय अगच्छ च राम ॐ नमः
dhyan mantraगुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
vaidik mantraॐ एह् ऊ षु ब्रवाणि तेऽग्न इत्थेतरा गिरः । एभिर्वर्धास इन्दुभिः ॥