शनि देव / दशरथ कृत शनि स्तोत्र स्तोत्र मंत्र
अतृप्ताय च वै नमः ज्ञान चक्षु नमस्ते। कश्यपासूनवे तुष्टोदासि वैराज्यम रुष्टो हरसि तत्क्षणात। 47
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति, बाधाओं का नाश, अटके कार्यों में सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति 37।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति, बाधाओं का नाश, अटके कार्यों में सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति 37।
इस मंत्र से क्या होगा?
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति, बाधाओं का नाश, अटके कार्यों में सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति
जाप विधि
शनिवार को सात्विक भाव से काले आसन पर बैठकर, शनिदेव की मूर्ति के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें 37।
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