मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.२) वैदिक मंत्र
ॐ येन कर्मण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
कर्म-कौशल में वृद्धि, शोध-कार्यों में सफलता, दृढ़ मानसिक संकल्प एवं कार्य में निरंतरता की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कर्म-कौशल में वृद्धि, शोध-कार्यों में सफलता, दृढ़ मानसिक संकल्प एवं कार्य में निरंतरता की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
कर्म-कौशल में वृद्धि, शोध-कार्यों में सफलता, दृढ़ मानसिक संकल्प एवं कार्य में निरंतरता की प्राप्ति
जाप विधि
किसी भी नवीन बौद्धिक, वैज्ञानिक या यज्ञीय कार्य के शुभारम्भ से पूर्व मानसिक रूप से १ बार जप।
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