भगवती सरस्वती (ज्ञान और विद्या की देवी) ध्यान मंत्र
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति
जाप विधि
ब्रह्ममुहूर्त में स्वच्छ वातावरण में बैठकर यह श्लोक जपें। देवी को श्वेत कमल पर आसीन, श्वेत वस्त्र धारण किए और वीणा लिए हुए मानसिक रूप से देखें। पूर्ण सचेतनता के साथ जप करें।
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ॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा
gyan mantraमेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजा । अप्सरासु च या मेधा गन्धर्वेषु च यन्मनः । दैवीं मेधा सरस्वती सा मां मेधा सुरभिर्जुषतां स्वाहा ॥
navgrah mantraॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
bhakti mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
ugra mantraह्रीं क्षं भक्ष ज्वाला जिह्वे कराल दंष्ट्रे प्रत्यंगिरे क्षं ह्रीं हूं फट्