ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवती सरस्वती (ज्ञान और विद्या की देवी)

भगवती सरस्वती (ज्ञान और विद्या की देवी) ध्यान मंत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति

जाप विधि

ब्रह्ममुहूर्त में स्वच्छ वातावरण में बैठकर यह श्लोक जपें। देवी को श्वेत कमल पर आसीन, श्वेत वस्त्र धारण किए और वीणा लिए हुए मानसिक रूप से देखें। पूर्ण सचेतनता के साथ जप करें।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

beej mantra

धां

kavach mantra

ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9

navgrah mantra

ॐ शुं शुक्राय नमः

jap mantra

ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा

mool mantra

ॐ श्री हनुमते नमः

ugra mantra

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा