भगवती सरस्वती (ज्ञान और विद्या की देवी) ध्यान मंत्र
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञानता और मानसिक जड़ता को पूर्ण रूप से नष्ट करना, एकाग्रता और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, और अध्ययन में सर्वोच्च ध्यान की प्राप्ति
जाप विधि
ब्रह्ममुहूर्त में स्वच्छ वातावरण में बैठकर यह श्लोक जपें। देवी को श्वेत कमल पर आसीन, श्वेत वस्त्र धारण किए और वीणा लिए हुए मानसिक रूप से देखें। पूर्ण सचेतनता के साथ जप करें।
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