महा प्रत्यंगिरा (अथर्वण भद्रकाली) उग्र मंत्र
ह्रीं क्षं भक्ष ज्वाला जिह्वे कराल दंष्ट्रे प्रत्यंगिरे क्षं ह्रीं हूं फट्
जीवन की घोर बाधाओं का निवारण, काले जादू व अभिचार का पूर्ण निष्कासन, मारक ग्रहों का शमन, और गहरे संचित नकारात्मक कर्मों (Deep-rooted sticky karmas) का नाश 2।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन की घोर बाधाओं का निवारण, काले जादू व अभिचार का पूर्ण निष्कासन, मारक ग्रहों का शमन, और गहरे संचित नकारात्मक कर्मों (Deep-rooted sticky karmas) का नाश 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन की घोर बाधाओं का निवारण, काले जादू व अभिचार का पूर्ण निष्कासन, मारक ग्रहों का शमन, और गहरे संचित नकारात्मक कर्मों (Deep-rooted sticky karmas) का नाश
जाप विधि
यह अत्यंत आक्रामक स्वरूप है। बिना गुरु दीक्षा के इसका जप वर्जित है। तत्त्वाचमन (4 चम्मच जल से आत्मा, विद्या और शिव तत्त्व का शोधन), प्राणायाम, संकल्प और विशेष अंग न्यास (हृदय, शिर, अस्त्र) संपन्न करने के पश्चात् जप किया जाता है 2।
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