काल भैरव (क्रूर शत्रुनाशक स्वरूप) उग्र मंत्र
ॐ भम भैरवाय नमस्तुभ्यम कपाले कृपणाय चंड मुंड विनाशाय वीरभद्र स्वरूपण सर्वत्र प्रभ देव रक्षक सुरा त्रोक्य विजय संभो नमस्ते काल रूपण ओम छम काल भैरवाय क्रूर रूपाय विकिरण मूर्धने श्री नेत्राय खग धणे दुर्जया भय हराय सर्व शत्रु संारकाय स्वाहा
शत्रु की चाल को भस्म करना, क्रूर व छिपे हुए शत्रुओं का पूर्ण विनाश और प्राणिक रक्षा 25।
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यह मंत्र क्यों?
शत्रु की चाल को भस्म करना, क्रूर व छिपे हुए शत्रुओं का पूर्ण विनाश और प्राणिक रक्षा 25।
इस मंत्र से क्या होगा?
शत्रु की चाल को भस्म करना, क्रूर व छिपे हुए शत्रुओं का पूर्ण विनाश और प्राणिक रक्षा
जाप विधि
काल भैरव के घोर और क्रूर रूप का ध्यान करते हुए, चिंतामुक्त होकर पूर्ण भरोसे के साथ मंत्र का निरंतर 108 बार पाठ व श्रवण 25।
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ॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ
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shanti mantraॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
vaidik mantraॐ शान्ता द्यौः शान्ता पृथिवी शान्तमिदमुर्वन्तरिक्षम् । शान्ता उदन्वतीरापः शान्ता नः सन्त्वोषधयः ॥
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