गुरु गोरखनाथ शत्रु नाशक शाबर मंत्र
ऊँ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ की। शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय 13
यह मंत्र कुटिल शत्रुओं के समूल नाश और उनके द्वारा रचे गए तंत्र-मंत्र या भौतिक षड्यंत्रों को नष्ट करने के लिए प्रयुक्त होता है 13। इस शाबर मंत्र में प्रयुक्त पंक्ति 'शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय'
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह मंत्र कुटिल शत्रुओं के समूल नाश और उनके द्वारा रचे गए तंत्र-मंत्र या भौतिक षड्यंत्रों को नष्ट करने के लिए प्रयुक्त होता है 13। इस शाबर मंत्र में प्रयुक्त पंक्ति 'शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय' का गहरा तांत्रिक अर्थ यह है कि भले ही साधक के अनगिनत (सवा लाख) शत्रु गुट बनाकर उस पर चारों ओर से प्रहार कर रहे हों, गोरखनाथ की इस जाग्रत ऊर्जा के अचूक प्रहार से उनके मुख्य नायक (एक) का पतन होते ही संपूर्ण शत्रु-सेना या उनका पूरा तांत्रिक तंत्र स्वतः ही भयभीत होकर छिन्न-भिन्न हो जाएगा (सब सिधाय) 13। यह शत्रु की शारीरिक ऊर्जा, उसके दुस्साहस और उसके मनोबल को पूरी तरह तोड़ देने वाला एक सिद्ध और अनुभूत विधान है।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मंत्र कुटिल शत्रुओं के समूल नाश और उनके द्वारा रचे गए तंत्र-मंत्र या भौतिक षड्यंत्रों को नष्ट करने के लिए प्रयुक्त होता है 13
इस शाबर मंत्र में प्रयुक्त पंक्ति 'शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय' का गहरा तांत्रिक अर्थ यह है कि भले ही साधक के अनगिनत (सवा लाख) शत्रु गुट बनाकर उस पर चारों ओर से प्रहार कर रहे हों, गोरखनाथ की इस जाग्रत ऊर्जा के अचूक प्रहार से उनके मुख्य नायक (एक) का पतन होते ही संपूर्ण शत्रु-सेना या उनका पूरा तांत्रिक तंत्र स्वतः ही भयभीत होकर छिन्न-भिन्न हो जाएगा (सब सिधाय) 13
यह शत्रु की शारीरिक ऊर्जा, उसके दुस्साहस और उसके मनोबल को पूरी तरह तोड़ देने वाला एक सिद्ध और अनुभूत विधान है
जाप विधि
इस तीव्र शत्रु-नाशक उग्र प्रयोग को मंगलकारी ऊर्जा और क्रोध के प्रतीक 'मंगलवार' के दिन ही संपन्न किया जाता है 13। साधक को लाल आसन पर बैठकर, बाह्य क्रोध-मुक्त किंतु भीतर से अत्यंत दृढ़ संकल्पित अवस्था में इस मंत्र का 108 बार जप करना होता है। यह जप साधक की स्वयं की ऊर्जा और सुरक्षा आभामंडल को पुष्ट करता है 13। तदुपरांत, शत्रु पर इसका अदृश्य प्रहार करने के लिए एक विशिष्ट लोक-तांत्रिक विधि का उपयोग किया जाता है: साधक एक ताजा, बेदाग नींबू लेता है, उस पर इस मंत्र का 21 बार पूर्ण एकाग्रता से जप करता है (मानो शत्रु की सारी ऊर्जा उस नींबू में खींच ली गई हो), और फिर उस अभिमंत्रित नींबू को उस मार्ग या विशिष्ट स्थान पर फेंक देता है जहाँ से शत्रु का नित्य आवागमन होता हो (शत्रु के मार्ग में) 13। जब शत्रु उस नींबू को पार करता है, तो ऊर्जा का विस्फोट उसके आभामंडल पर प्रहार करता है।
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