ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
लोना चमारिन (मोहिनी विद्या एवं अचूक वशीकरण)

लोना चमारिन (मोहिनी विद्या एवं अचूक वशीकरण) शाबर मंत्र

दुहाई लोना चमारिन की, आन बीर मसान की (अमुक का नाम) 20

इस अमोघ मंत्र का प्रधान प्रयोजन अचूक वशीकरण, तीव्र सम्मोहन और रूठे हुए या दूर जाते व्यक्तियों को बलपूर्वक अपने समीप लाना है 20। यदि कार्यक्षेत्र (ऑफिस), परिवार या समाज में कोई व्यक्ति निरंतर दूर जा रह

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारशाबर मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

इस अमोघ मंत्र का प्रधान प्रयोजन अचूक वशीकरण, तीव्र सम्मोहन और रूठे हुए या दूर जाते व्यक्तियों को बलपूर्वक अपने समीप लाना है 20। यदि कार्यक्षेत्र (ऑफिस), परिवार या समाज में कोई व्यक्ति निरंतर दूर जा रहा हो, या लाख यत्नों के बाद भी संबंध मधुर न हो रहे हों, तो यह मंत्र सीधे लक्षित व्यक्ति के अवचेतन मन (Subconscious Mind) पर प्रहार करता है 21। लोना चमारिन की 'दुहाई' और 'बीर मसान की आन' का उपयोग कर श्मशान की मोहिनी ऊर्जा को जाग्रत किया जाता है, जो लक्षित व्यक्ति के मन में साधक के प्रति तीव्र, अनियंत्रित और सम्मोहक आकर्षण उत्पन्न करती है, जिससे वह व्यक्ति स्वयं साधक के समीप आने को विवश हो जाता है 20।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

इस अमोघ मंत्र का प्रधान प्रयोजन अचूक वशीकरण, तीव्र सम्मोहन और रूठे हुए या दूर जाते व्यक्तियों को बलपूर्वक अपने समीप लाना है 20

02

यदि कार्यक्षेत्र (ऑफिस), परिवार या समाज में कोई व्यक्ति निरंतर दूर जा रहा हो, या लाख यत्नों के बाद भी संबंध मधुर न हो रहे हों, तो यह मंत्र सीधे लक्षित व्यक्ति के अवचेतन मन (Subconscious Mind) पर प्रहार करता है 21

03

लोना चमारिन की 'दुहाई' और 'बीर मसान की आन' का उपयोग कर श्मशान की मोहिनी ऊर्जा को जाग्रत किया जाता है, जो लक्षित व्यक्ति के मन में साधक के प्रति तीव्र, अनियंत्रित और सम्मोहक आकर्षण उत्पन्न करती है, जिससे वह व्यक्ति स्वयं साधक के समीप आने को विवश हो जाता है

जाप विधि

अघोर और शाबर तंत्र में 'लोना चमारिन' (जो गुरु गोरखनाथ और इस्माइल जोगी के समकक्ष एक अत्यंत सिद्ध तांत्रिक महिला मानी जाती हैं) की वशीकरण और आकर्षण साधना अत्यंत उग्र, त्वरित और गुप्त मानी गई है 20। मंत्र जप के समय रिक्त स्थान (अमुक) पर उस इष्ट या लक्षित व्यक्ति का नाम लेना अनिवार्य है जिसे वशीभूत करना अभीष्ट हो 20। इस अनुष्ठान में ब्रह्मचर्य का पालन अत्यंत कठोरता से करना होता है, क्योंकि यह सीधे काम-ऊर्जा (Sexual Energy) पर प्रहार करता है 23। साधना काल के दौरान साधक की कड़ी मनोवैज्ञानिक व आध्यात्मिक परीक्षा हो सकती है; तंत्र की शक्तियां या स्वयं देवी अत्यंत मोहक स्वरूप में साधक के समक्ष प्रकट हो सकती हैं, जिससे उसकी कामवासना जाग्रत हो सकती है 23। साधक को पूर्ण धैर्य बनाए रखना होता है तथा किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से बचना होता है 23। यदि साधक विचलित होकर वीर्यपात (शीघ्रपतन) कर बैठता है, तो साधना उसी क्षण खंडित हो जाती है, यद्यपि देवी कोई अहित नहीं करतीं और साधक पुनः प्रयास कर सकता है। यह साधना रातों-रात चमत्कारिक परिणाम दिखाने में सक्षम है, अतः इत्र (Ittar) का प्रयोग कर, पूर्ण एकाग्रता और आंख मूंदकर ध्यान की अवस्था में इसका जप किया जाता है 21।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

kaamya mantra

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

tantrik mantra

ॐ ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः

ugra mantra

ॐ ऐं ह्रीं महाकालिकायै सर्व शत्रु नाशाय नाशाय

kavach mantra

श्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27

gyan mantra

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः ॥

bhakti mantra

ॐ जय हरि विट्ठल नमो नमः पंढरीनाथा नमो नमः