ईशान देव (आकाश तत्व) बीज बीज मंत्र
हं
आकाश (ईथर) तत्व की जागृति, सार्वभौमिक चेतना (Universal Consciousness) से सीधा जुड़ाव, और वाणी व संचार (Communication) में परम स्पष्टता 52। अन्य प्रमुख देवता एवं वर्णेश्वरी मातृका (सृष्टि के मूल स्वर)
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
आकाश (ईथर) तत्व की जागृति, सार्वभौमिक चेतना (Universal Consciousness) से सीधा जुड़ाव, और वाणी व संचार (Communication) में परम स्पष्टता 52। अन्य प्रमुख देवता एवं वर्णेश्वरी मातृका (सृष्टि के मूल स्वर) सनातन तंत्र परंपरा में सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, प्रेम के देवता कामदेव, और यक्षराज कुबेर के बीज मंत्र भी अत्यंत गोपनीय और भौतिक जीवन में अचूक माने गए हैं। इसके अतिरिक्त, तंत्र शास्त्र में 'ॐ' को परमसत्ता का नाद और संस्कृत की 50 मातृकाओं (अक्षरों) को देवी वर्णेश्वरी (सरस्वती) का साक्षात स्वरूप माना गया है, जो शरीर के विभिन्न चक्रों की पंखुड़ियों (Petals) पर निवास करती हैं 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
आकाश (ईथर) तत्व की जागृति, सार्वभौमिक चेतना (Universal Consciousness) से सीधा जुड़ाव, और वाणी व संचार (Communication) में परम स्पष्टता 52
अन्य प्रमुख देवता एवं वर्णेश्वरी मातृका (सृष्टि के मूल स्वर) सनातन तंत्र परंपरा में सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, प्रेम के देवता कामदेव, और यक्षराज कुबेर के बीज मंत्र भी अत्यंत गोपनीय और भौतिक जीवन में अचूक माने गए हैं
इसके अतिरिक्त, तंत्र शास्त्र में 'ॐ' को परमसत्ता का नाद और संस्कृत की 50 मातृकाओं (अक्षरों) को देवी वर्णेश्वरी (सरस्वती) का साक्षात स्वरूप माना गया है, जो शरीर के विभिन्न चक्रों की पंखुड़ियों (Petals) पर निवास करती हैं
जाप विधि
गले के विशुद्ध चक्र (Throat Chakra) पर ध्यान करते हुए 108 बार जप करें 19।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेथामयं च। अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सीदत।।
sabar mantraओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1
siddh mantraॐ ऐं क्लीं सौः। क ए ल ह ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। क स क ह ल ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। स क ल ह्रीं । सौः क्लीं ऐं ॐ॥
naam mantraभार्गव
bhakti mantraसीता राम सीता राम जय जय सीता राम
dhyan mantraॐ