ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
उग्र तारा (एकजटा) तांत्रिक

उग्र तारा (एकजटा) तांत्रिक तांत्रिक मंत्र

ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्

घोर संकटों से रक्षा, वाक्-सिद्धि की प्राप्ति, उच्चाधिकारियों से कृपा व कार्य सिद्धि, और प्रबल शत्रुओं तथा प्रतियोगिताओं में पूर्ण विजय 16।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारतांत्रिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

घोर संकटों से रक्षा, वाक्-सिद्धि की प्राप्ति, उच्चाधिकारियों से कृपा व कार्य सिद्धि, और प्रबल शत्रुओं तथा प्रतियोगिताओं में पूर्ण विजय 16।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

घोर संकटों से रक्षा, वाक्-सिद्धि की प्राप्ति, उच्चाधिकारियों से कृपा व कार्य सिद्धि, और प्रबल शत्रुओं तथा प्रतियोगिताओं में पूर्ण विजय

जाप विधि

इस मंत्र के जप से पूर्व ऋष्यादि न्यास अनिवार्य है (पतंजलि ऋषि, गायत्री छन्द, एकजटा तारा देवता)। न्यास प्रक्रिया में ही 30 से 45 मिनट का समय लगता है। पूर्ण सिद्धि हेतु 4,00,000 जप का विधान है। रात्रि के समय नीले कमल (blue lily) का अर्पण कर इस मंत्र की उपासना की जाती है। पुनर्वसु, पूर्वाभाद्रपद या विशाखा नक्षत्र में अनुष्ठान अति उत्तम माना गया है। पूर्णिमा या अमावस्या से पूर्व तृतीया तिथि को विशेष पूजन किया जाता है 16।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

bhakti mantra

जय जय राम कृष्ण हरि

mool mantra

ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगतपते देही मे तनय कृष्ण त्वामह शरणं गतः

stotra mantra

ईशानः प्राणदः प्राणो ज्येष्ठः श्रेष्ठः प्रजापतिः । हिरण्यगर्भो भूगर्भो माधवो मधुसूदनः ॥ 12

jap mantra

ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय वैराजमूर्तये मेघात्मने श्रीं नरसिंहवपुषे नमः

vaidik mantra

ॐ पुनन्तु मा देवजनाः पुनन्तु मनसा धियः । पुनन्तु विश्वा भूतानि जातवेदः पुनीहि मा ॥

gyan mantra

मेधादेवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्य माना । त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान् बृहद्वदेम विदथे सुवीराः । त्वया जुष्ट ऋषिर्भवति देवि त्वया ब्रह्माऽऽगतश्रीरुत त्वया । त्वया जुष्टश्चित्रं विन्दते वसु सा नो जुषस्व द्रविणो न मेधे ॥