उग्र तारा (एकजटा) तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्
घोर संकटों से रक्षा, वाक्-सिद्धि की प्राप्ति, उच्चाधिकारियों से कृपा व कार्य सिद्धि, और प्रबल शत्रुओं तथा प्रतियोगिताओं में पूर्ण विजय 16।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घोर संकटों से रक्षा, वाक्-सिद्धि की प्राप्ति, उच्चाधिकारियों से कृपा व कार्य सिद्धि, और प्रबल शत्रुओं तथा प्रतियोगिताओं में पूर्ण विजय 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर संकटों से रक्षा, वाक्-सिद्धि की प्राप्ति, उच्चाधिकारियों से कृपा व कार्य सिद्धि, और प्रबल शत्रुओं तथा प्रतियोगिताओं में पूर्ण विजय
जाप विधि
इस मंत्र के जप से पूर्व ऋष्यादि न्यास अनिवार्य है (पतंजलि ऋषि, गायत्री छन्द, एकजटा तारा देवता)। न्यास प्रक्रिया में ही 30 से 45 मिनट का समय लगता है। पूर्ण सिद्धि हेतु 4,00,000 जप का विधान है। रात्रि के समय नीले कमल (blue lily) का अर्पण कर इस मंत्र की उपासना की जाती है। पुनर्वसु, पूर्वाभाद्रपद या विशाखा नक्षत्र में अनुष्ठान अति उत्तम माना गया है। पूर्णिमा या अमावस्या से पूर्व तृतीया तिथि को विशेष पूजन किया जाता है 16।
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