हरिद्रा गणपति तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ हूं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वर वरद सर्व जन हृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा
किसी भी प्रकार के अभिचार (Black Magic) का नाश, शत्रुओं और जनमानस का वशीकरण (स्तंभन), तथा विवाह में आने वाली बाधाओं की निवृत्ति 72।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
किसी भी प्रकार के अभिचार (Black Magic) का नाश, शत्रुओं और जनमानस का वशीकरण (स्तंभन), तथा विवाह में आने वाली बाधाओं की निवृत्ति 72।
इस मंत्र से क्या होगा?
किसी भी प्रकार के अभिचार (Black Magic) का नाश, शत्रुओं और जनमानस का वशीकरण (स्तंभन), तथा विवाह में आने वाली बाधाओं की निवृत्ति
जाप विधि
पीत वस्त्र और पीतासन का उपयोग करें। कुल 1,00,000 बार जप, 10,000 आहुतियों का होम, 1000 तर्पण और 100 मार्जन का विधान है। हल्दी के रंग के (स्वर्णिम) गणपति का ध्यान करें 73।
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ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
ugra mantraॐ खं खं खं सर्व शत्रु संहारणाय स्वाहा
naam mantraराधे राधे
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