ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवती महालक्ष्मी (गायत्री)

भगवती महालक्ष्मी (गायत्री) जप मंत्र

ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्॥

घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद। 48

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारजप मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद। 48

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद

जाप विधि

१०८ बार, कमलगट्टे अथवा स्फटिक की माला से नित्य जप। 48

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