भगवती महालक्ष्मी (गायत्री) जप मंत्र
ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्॥
घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद। 48
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद। 48
इस मंत्र से क्या होगा?
घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद
जाप विधि
१०८ बार, कमलगट्टे अथवा स्फटिक की माला से नित्य जप। 48
विशेष टिप्पणियाँ
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navgrah mantraॐ भास्कराय विद्महे महद्द्युतिकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।
siddh mantraॐ अं अणिमायै नमः स्वाहा ।
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
tantrik mantraॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्लीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा