भगवती महालक्ष्मी (गायत्री) जप मंत्र
ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्॥
घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद। 48
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद। 48
इस मंत्र से क्या होगा?
घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद
जाप विधि
१०८ बार, कमलगट्टे अथवा स्फटिक की माला से नित्य जप। 48
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