सूर्यनारायण / सवितृमंडल ध्यान मंत्र
ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
आलस्य, प्रमाद और नकारात्मक ऊर्जा का नाश, आरोग्य व तेजस्विता की प्राप्ति, और ध्यान को ज्योतिर्मय तत्त्व पर एकाग्र करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आलस्य, प्रमाद और नकारात्मक ऊर्जा का नाश, आरोग्य व तेजस्विता की प्राप्ति, और ध्यान को ज्योतिर्मय तत्त्व पर एकाग्र करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
आलस्य, प्रमाद और नकारात्मक ऊर्जा का नाश, आरोग्य व तेजस्विता की प्राप्ति, और ध्यान को ज्योतिर्मय तत्त्व पर एकाग्र करना
जाप विधि
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय इसका पाठ करें। सूर्य के प्रकाशमय मंडल के मध्य कमल पर आसीन, स्वर्णिम आभा वाले भगवान नारायण की मानसिक छवि भृकुटी में बनाएं।
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राधे कृष्ण
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