सूर्यनारायण / सवितृमंडल ध्यान मंत्र
ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
आलस्य, प्रमाद और नकारात्मक ऊर्जा का नाश, आरोग्य व तेजस्विता की प्राप्ति, और ध्यान को ज्योतिर्मय तत्त्व पर एकाग्र करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आलस्य, प्रमाद और नकारात्मक ऊर्जा का नाश, आरोग्य व तेजस्विता की प्राप्ति, और ध्यान को ज्योतिर्मय तत्त्व पर एकाग्र करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
आलस्य, प्रमाद और नकारात्मक ऊर्जा का नाश, आरोग्य व तेजस्विता की प्राप्ति, और ध्यान को ज्योतिर्मय तत्त्व पर एकाग्र करना
जाप विधि
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय इसका पाठ करें। सूर्य के प्रकाशमय मंडल के मध्य कमल पर आसीन, स्वर्णिम आभा वाले भगवान नारायण की मानसिक छवि भृकुटी में बनाएं।
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ॐ शान्ता द्यौः शान्ता पृथिवी शान्तमिदमुर्वन्तरिक्षम् । शान्ता उदन्वतीरापः शान्ता नः सन्त्वोषधयः ॥
jap mantraॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
gyan mantraआ मां मेधा सुरभिर्विश्वरुपा हिरण्यवर्णा जगती जगम्या । ऊर्जस्वती पयसा पिन्वमाना सा मां मेधा सुप्रतीका जुषन्ताम् ॥
stotra mantra॥ दोहा ॥ लाल देह लाली लसे, अरू धरि लाल लंगूर । बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥ 40
mool mantraॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
tantrik mantraॐ नमो भगवते महानृसिंहाय सिंहाय सिंहमुखाय विकटाय वज्रनखाय मां रक्ष रक्ष ममशरीरं नखशिखापर्यन्तं रक्ष रक्ष कुरु कुरु मदीयं शरीरं वज्राङ्गम् कुरु कुरु परयन्त्र परमन्त्र परतन्त्राणां क्षिणु क्षिणु स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा