महा सुदर्शन (अहिर्बुध्न्य संहिता) सिद्ध मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय पराय परमपुरुषाय परात्मने परकर्म मन्त्र यन्त्र तन्त्र औषध विष आभिचार अस्त्र शस्त्र संहर संहर मृत्युर् मोचय मोचय । ॐ नमो भगवते महा सुदर्शनाय । ॐ प्रीं रीं रुँ दीप्त्रेय ज्वलापरीताय सर्वदिग्क्षोभनकाराय कारय हुं फट् परब्रह्मणे परमज्योतिषे स्वाहा ।
सभी प्रकार के रोग, विष, अस्त्र-शस्त्र, और अभिचार (Black Magic) कर्मों का समूल नाश 67। यह साधक को कर्म-बंधनों से मुक्त करता है और अकाल मृत्यु को टालकर सभी शारीरिक और सूक्ष्म रोगों को नष्ट कर देता है 67
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सभी प्रकार के रोग, विष, अस्त्र-शस्त्र, और अभिचार (Black Magic) कर्मों का समूल नाश 67। यह साधक को कर्म-बंधनों से मुक्त करता है और अकाल मृत्यु को टालकर सभी शारीरिक और सूक्ष्म रोगों को नष्ट कर देता है 67।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी प्रकार के रोग, विष, अस्त्र-शस्त्र, और अभिचार (Black Magic) कर्मों का समूल नाश 67
यह साधक को कर्म-बंधनों से मुक्त करता है और अकाल मृत्यु को टालकर सभी शारीरिक और सूक्ष्म रोगों को नष्ट कर देता है
जाप विधि
यह बीजाक्षरों और रक्षा-आदेशों से युक्त महामंत्र है 67। सुदर्शन चक्र का भगवान विष्णु के अस्त्र के रूप में ध्यान कर, सुदर्शन यंत्र के सम्मुख पूर्ण निष्ठा के साथ जप किया जाता है 67।
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वैद्यनाथ
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