ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
सौभाग्यविद्या पञ्चदशी

सौभाग्यविद्या पञ्चदशी सिद्ध मंत्र

ॐ ऐं क्लीं सौः। क ए ल ह ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। क स क ह ल ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। स क ल ह्रीं । सौः क्लीं ऐं ॐ॥

अहंकार और सीमित चेतना (Egocentrism) का पूर्ण विनाश 28। यह ब्रह्मांडीय करुणा (Universal Compassion) को जाग्रत करता है 28। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की एक साथ सिद्धि 29। समस्त इच्छाओ

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अहंकार और सीमित चेतना (Egocentrism) का पूर्ण विनाश 28। यह ब्रह्मांडीय करुणा (Universal Compassion) को जाग्रत करता है 28। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की एक साथ सिद्धि 29। समस्त इच्छाओं की पूर्ति और देवी की पूर्ण कृपा दृष्टि प्राप्त करने का यह अमोघ साधन है 29।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अहंकार और सीमित चेतना (Egocentrism) का पूर्ण विनाश 28

02

यह ब्रह्मांडीय करुणा (Universal Compassion) को जाग्रत करता है 28

03

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की एक साथ सिद्धि 29

04

समस्त इच्छाओं की पूर्ति और देवी की पूर्ण कृपा दृष्टि प्राप्त करने का यह अमोघ साधन है

जाप विधि

यह मंत्र श्री चक्र के गुण और न्यास विधियों के साथ उच्चारित किया जाता है 27। दीक्षा के बिना यह पूर्णतया वर्जित है 28। साधक को गुरु द्वारा बताए गए पुरश्चरण के नियमों का पालन करते हुए श्री चक्र के रहस्यों पर ध्यान केंद्रित कर इसका सस्वर मानसिक जप करना होता है 28।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

shanti mantra

ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

ugra mantra

॥ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: ॥

beej mantra

फ्रौं

kavach mantra

पातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15

kaamya mantra

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

naam mantra

हनुमान