सौभाग्यविद्या पञ्चदशी सिद्ध मंत्र
ॐ ऐं क्लीं सौः। क ए ल ह ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। क स क ह ल ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। स क ल ह्रीं । सौः क्लीं ऐं ॐ॥
अहंकार और सीमित चेतना (Egocentrism) का पूर्ण विनाश 28। यह ब्रह्मांडीय करुणा (Universal Compassion) को जाग्रत करता है 28। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की एक साथ सिद्धि 29। समस्त इच्छाओ
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अहंकार और सीमित चेतना (Egocentrism) का पूर्ण विनाश 28। यह ब्रह्मांडीय करुणा (Universal Compassion) को जाग्रत करता है 28। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की एक साथ सिद्धि 29। समस्त इच्छाओं की पूर्ति और देवी की पूर्ण कृपा दृष्टि प्राप्त करने का यह अमोघ साधन है 29।
इस मंत्र से क्या होगा?
अहंकार और सीमित चेतना (Egocentrism) का पूर्ण विनाश 28
यह ब्रह्मांडीय करुणा (Universal Compassion) को जाग्रत करता है 28
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की एक साथ सिद्धि 29
समस्त इच्छाओं की पूर्ति और देवी की पूर्ण कृपा दृष्टि प्राप्त करने का यह अमोघ साधन है
जाप विधि
यह मंत्र श्री चक्र के गुण और न्यास विधियों के साथ उच्चारित किया जाता है 27। दीक्षा के बिना यह पूर्णतया वर्जित है 28। साधक को गुरु द्वारा बताए गए पुरश्चरण के नियमों का पालन करते हुए श्री चक्र के रहस्यों पर ध्यान केंद्रित कर इसका सस्वर मानसिक जप करना होता है 28।
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