ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
अष्टसिद्धि योग (प्राप्ति सिद्धि)

अष्टसिद्धि योग (प्राप्ति सिद्धि) सिद्ध मंत्र

ॐ प्रं प्राप्त्यै नमः स्वाहा ।

ब्रह्मांड में किसी भी वस्तु को प्राप्त करने या कहीं भी बिना रोक-टोक के पहुँचने की क्षमता (Teleportation / Unhindered access) 50। यह साधक के मानसिक फोकस को इतना तीक्ष्ण कर देता है कि उसके निर्धारित लक्

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

ब्रह्मांड में किसी भी वस्तु को प्राप्त करने या कहीं भी बिना रोक-टोक के पहुँचने की क्षमता (Teleportation / Unhindered access) 50। यह साधक के मानसिक फोकस को इतना तीक्ष्ण कर देता है कि उसके निर्धारित लक्ष्य स्वतः पूर्ण होने लगते हैं 50।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

ब्रह्मांड में किसी भी वस्तु को प्राप्त करने या कहीं भी बिना रोक-टोक के पहुँचने की क्षमता (Teleportation / Unhindered access) 50

02

यह साधक के मानसिक फोकस को इतना तीक्ष्ण कर देता है कि उसके निर्धारित लक्ष्य स्वतः पूर्ण होने लगते हैं

जाप विधि

अष्टसिद्धि मंडल साधना के अंतर्गत दक्षिण (South) दिशा की ओर मुख करके उच्चारण किया जाता है 53।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

ugra mantra

ॐ हूं स्फारय-स्फारय, मारय-मारय, शत्रु-वर्गान् नाशय-नाशय स्वाहा

jap mantra

ॐ गण गणपतये नमः

mool mantra

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः

gyan mantra

अहं ब्रह्मास्मि

kaamya mantra

ॐ पातु शिरसि नित्यं पातु ह्रीं कण्ठदेशके। नृसिंह पातु हृदये आपदुद्धारणाय च॥

kavach mantra

पातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15