सरस्वती गायत्री (कामराज) सिद्ध मंत्र
ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
कला, शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में असीमित सफलता 74। यह मंत्र मन को शांत कर बौद्धिक स्पष्टता और तीव्र एकाग्रता प्रदान करता है 74।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कला, शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में असीमित सफलता 74। यह मंत्र मन को शांत कर बौद्धिक स्पष्टता और तीव्र एकाग्रता प्रदान करता है 74।
इस मंत्र से क्या होगा?
कला, शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में असीमित सफलता 74
यह मंत्र मन को शांत कर बौद्धिक स्पष्टता और तीव्र एकाग्रता प्रदान करता है
जाप विधि
'ऐं' बीज पर केंद्रित होकर और देवी को सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाले (Ruler of desires) स्वरूप में ध्यान कर जप 74।
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स्फेम्
mool mantraॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
stotra mantraकमले कमलाक्ष वल्लभे त्वं करुणा पूर तरङ्गितैरपाङ्गैः । अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥ 26
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
naam mantraगिरधारी
kaamya mantraस्ह्क्ल्रीं हं॥