शरभ शालुव (आकाश भैरव कल्प) सिद्ध मंत्र
ॐ बन्धय बन्धय मारय मारय नाशय नाशय हुं फट् स्वाहा
भूत-प्रेत, वेताल, और ब्रह्मराक्षस जैसी नकारात्मक शक्तियों का पूर्ण शमन 86। यह उग्र तांत्रिक कर्मों (स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन) में प्रयुक्त होता है और गहरे मनोवैज्ञानिक भय व ग्रहों के दोषों को जड़ से
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
भूत-प्रेत, वेताल, और ब्रह्मराक्षस जैसी नकारात्मक शक्तियों का पूर्ण शमन 86। यह उग्र तांत्रिक कर्मों (स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन) में प्रयुक्त होता है और गहरे मनोवैज्ञानिक भय व ग्रहों के दोषों को जड़ से उखाड़ फेंकता है 85।
इस मंत्र से क्या होगा?
भूत-प्रेत, वेताल, और ब्रह्मराक्षस जैसी नकारात्मक शक्तियों का पूर्ण शमन 86
यह उग्र तांत्रिक कर्मों (स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन) में प्रयुक्त होता है और गहरे मनोवैज्ञानिक भय व ग्रहों के दोषों को जड़ से उखाड़ फेंकता है
जाप विधि
आकाश भैरव कल्प तंत्र के अंतर्गत इस माला मंत्र का विधिवत यन्त्र पूजन, रुद्राभिषेक और विशिष्ट आहुतियों के साथ जप किया जाता है 85।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।
sabar mantraगुरु गोरखनाथ की दुहाई, फूल चढ़े तो वह मोहे। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना 13
vaidik mantraॐ त्वं नो अग्ने महोभिः पाहि विश्वस्या अरातेः । उत द्विषो मर्त्यस्य ॥
dhyan mantraध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
gyan mantraउद्गीथ प्रणवोद्गीत सर्व वागीश्वरेश्वर । सर्व वेदमया चिन्त्यः सर्वं बोधय बोधय ॥
bhakti mantraजय जगन्नाथ