ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
छिन्नमस्ता महाविद्या

छिन्नमस्ता महाविद्या सिद्ध मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा ॥

ईडा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों का प्रत्यक्ष जागरण 8। यह काम और रति (भौतिक वासना) पर पूर्ण विजय, देह-अहंकार का विनाश, और शत्रुओं का निर्मूलन करता है 8। यह मंत्र अनंत आध्यात्मिक शक्ति (Shiva-Shakti un

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

ईडा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों का प्रत्यक्ष जागरण 8। यह काम और रति (भौतिक वासना) पर पूर्ण विजय, देह-अहंकार का विनाश, और शत्रुओं का निर्मूलन करता है 8। यह मंत्र अनंत आध्यात्मिक शक्ति (Shiva-Shakti union) और असीमित ज्ञान प्रदान करता है 8।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

ईडा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों का प्रत्यक्ष जागरण 8

02

यह काम और रति (भौतिक वासना) पर पूर्ण विजय, देह-अहंकार का विनाश, और शत्रुओं का निर्मूलन करता है 8

03

यह मंत्र अनंत आध्यात्मिक शक्ति (Shiva-Shakti union) और असीमित ज्ञान प्रदान करता है

जाप विधि

साधक पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख कर जप करता है 36। पूर्ण सिद्धि के लिए ४ लाख जप और पलाश या बिल्व पुष्पों से ४०,००० आहुतियों का विधान है 37। जप से पूर्व और पश्चात इसे 'ॐ ह्रीं ॐ' से सम्पुटित (लॉक/अनलॉक) किया जाता है 37।

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क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23

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