भगवान श्री विट्ठल (पांडुरंग) भक्ति मंत्र
जय जय राम कृष्ण हरि
परब्रह्म के साथ पूर्ण तादात्म्य (एकाकार) स्थापित करने, अहंकार और त्रिविध दुखों का नाश करने, तथा भगवान विट्ठल के प्रति शुद्ध भक्ति और प्रेमानंद (ब्रह्मानंद) की सर्वोच्च अवस्था प्राप्त करने के लिए इसे ज
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
परब्रह्म के साथ पूर्ण तादात्म्य (एकाकार) स्थापित करने, अहंकार और त्रिविध दुखों का नाश करने, तथा भगवान विट्ठल के प्रति शुद्ध भक्ति और प्रेमानंद (ब्रह्मानंद) की सर्वोच्च अवस्था प्राप्त करने के लिए इसे जपा जाता है 61।
इस मंत्र से क्या होगा?
परब्रह्म के साथ पूर्ण तादात्म्य (एकाकार) स्थापित करने, अहंकार और त्रिविध दुखों का नाश करने, तथा भगवान विट्ठल के प्रति शुद्ध भक्ति और प्रेमानंद (ब्रह्मानंद) की सर्वोच्च अवस्था प्राप्त करने के लिए इसे जपा जाता है
जाप विधि
वारकरी संप्रदाय का यह सर्वप्रमुख बीज व नाम-मंत्र है, जिसे बिना किसी कठिन कर्मकांड के उठते-बैठते, चलते-फिरते, वारी (तीर्थयात्रा) करते हुए या कीर्तन में निरंतर जपा जाता है 60। इसे तुलसी की माला पर प्रतिदिन न्यूनतम १०८ बार जपने का भी विधान है 60। एकादशी के दिन या पंढरपुर यात्रा के समय सामूहिक संकीर्तन में इसका वाचिक जप अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है 60।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ हं सं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः
kaamya mantraदुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥
shanti mantraॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
mool mantraॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
dhyan mantraवसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
vaidik mantraॐ अहमेव स्वयमिदं वदामि जुष्टं देवेभिरुत मानुषेभिः । यं कामये तंतमुग्रं कृणोमि तं ब्रह्माणं तमृषिं तं सुमेधाम् ॥