ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान श्री राम

भगवान श्री राम भक्ति मंत्र

ॐ श्री रामः शरणं मम

अपने संपूर्ण अस्तित्व और अहंकार को भगवान राम के चरणों में सौंप देना, तथा जीवन के सभी दायित्वों और चिंताओं से मुक्त होकर शुद्ध शरणागति (प्रपत्ति) प्राप्त करना 15।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारभक्ति मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अपने संपूर्ण अस्तित्व और अहंकार को भगवान राम के चरणों में सौंप देना, तथा जीवन के सभी दायित्वों और चिंताओं से मुक्त होकर शुद्ध शरणागति (प्रपत्ति) प्राप्त करना 15।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अपने संपूर्ण अस्तित्व और अहंकार को भगवान राम के चरणों में सौंप देना, तथा जीवन के सभी दायित्वों और चिंताओं से मुक्त होकर शुद्ध शरणागति (प्रपत्ति) प्राप्त करना

जाप विधि

शरणागति का यह मंत्र अत्यंत कातर और दीन भाव से जपा जाता है 15। इसमें श्वास को शांत कर, मन को पूरी तरह राम के चरणों में केंद्रित कर इसका मानसिक (मानस) जप करना चाहिए 4।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

tantrik mantra

ॐ अं अणिमायै नमः स्वाहा

navgrah mantra

ॐ गदाहस्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।

naam mantra

वाणी

shanti mantra

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

vaidik mantra

ॐ अग्निं दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम् । अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम् ॥

kavach mantra

ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4