भगवान श्री राम भक्ति मंत्र
रामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये
भगवान रामचंद्र के युगल चरणों में अटूट निष्ठा और अनन्य आश्रय की प्राप्ति, जिससे जन्म-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त हो सके 15।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भगवान रामचंद्र के युगल चरणों में अटूट निष्ठा और अनन्य आश्रय की प्राप्ति, जिससे जन्म-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त हो सके 15।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान रामचंद्र के युगल चरणों में अटूट निष्ठा और अनन्य आश्रय की प्राप्ति, जिससे जन्म-मृत्यु के चक्र से मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त हो सके
जाप विधि
यह प्रपत्ति (पूर्ण आत्मसमर्पण) का मंत्र है। इसे नित्य पूजा के अंत में या ध्यान की अवस्था में बैठकर मानसिक रूप से जपा जाता है 15।
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श्रीं क्लीं श्रीं॥
tantrik mantraॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
dhyan mantraध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ
navgrah mantraॐ नाकध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात्।
vaidik mantraॐ अप्सरासु च या मेधा गन्धर्वेषु च यन्मनः । दैवीं मेधा सरस्वती सा मां मेधा सुरभिर्जुषतां स्वाहा ॥