ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
माता महाकाली

माता महाकाली भक्ति मंत्र

ॐ श्री कालिकायै नमः

अचानक आए भारी संकटों से तत्काल मुक्ति, आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ आदि) पर विजय, जीवन में शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह और माता काली के प्रति अनन्य भक्ति एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना 5

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारभक्ति मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अचानक आए भारी संकटों से तत्काल मुक्ति, आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ आदि) पर विजय, जीवन में शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह और माता काली के प्रति अनन्य भक्ति एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना 55।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अचानक आए भारी संकटों से तत्काल मुक्ति, आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ आदि) पर विजय, जीवन में शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह और माता काली के प्रति अनन्य भक्ति एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना

जाप विधि

इस सिद्ध नाम-मंत्र का जप रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पर पूर्ण पवित्रता के साथ किया जाना चाहिए 45। इसे मंगलवार या शुक्रवार के दिन माता काली के चित्र के सम्मुख मीठा पान या मिष्ठान का भोग लगाकर १०८ बार जपना श्रेष्ठ है 55। जप के समय मन में किसी के अहित की भावना नहीं होनी चाहिए, केवल माता के प्रति निष्काम दास भाव होना चाहिए 55।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

ugra mantra

ॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा

tantrik mantra

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भुवनेश्वर्यै नमः

sabar mantra

राम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25

kavach mantra

नासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31

gyan mantra

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

jap mantra

ॐ श्री दुर्गायै नमः