भगवान श्री सूर्य नारायण भक्ति मंत्र
ॐ सूर्याय नमः
यह मंत्र प्रत्यक्ष देवता सूर्य के प्रति कृतज्ञता और अनन्य भक्ति प्रकट करने, जीवन में रोगमुक्ति, तेज, आत्मविश्वास और ब्रह्मांडीय सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए जपा जाता है 83।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
यह मंत्र प्रत्यक्ष देवता सूर्य के प्रति कृतज्ञता और अनन्य भक्ति प्रकट करने, जीवन में रोगमुक्ति, तेज, आत्मविश्वास और ब्रह्मांडीय सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए जपा जाता है 83।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मंत्र प्रत्यक्ष देवता सूर्य के प्रति कृतज्ञता और अनन्य भक्ति प्रकट करने, जीवन में रोगमुक्ति, तेज, आत्मविश्वास और ब्रह्मांडीय सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए जपा जाता है
जाप विधि
प्रातः काल सूर्योदय के समय, पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान सूर्य को जल (अर्घ्य) देते समय इस मंत्र का ११ या १०८ बार जप करना सबसे उत्तम और प्रामाणिक माना गया है 82। यदि माला का उपयोग करना हो तो लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला का उपयोग किया जा सकता है 48।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
beej mantraकें
ugra mantraॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
sabar mantraओम नमो महादेवी सर्व कार्य सिद्धि करनी जो पाती पूरे ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों देवन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति श्री गुरु गोरखनाथ की दुहाई फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा 3
navgrah mantraॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥