महादेवी एवं गुरु गोरखनाथ सर्वकार्य सिद्धि शाबर मंत्र
ओम नमो महादेवी सर्व कार्य सिद्धि करनी जो पाती पूरे ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों देवन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति श्री गुरु गोरखनाथ की दुहाई फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा 3
इस शाबर प्रयोग का मुख्य प्रयोजन उन असाध्य, अत्यंत जटिल भौतिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक कार्यों की त्वरित सिद्धि है, जो सामान्य मानवीय प्रयासों और वैदिक अनुष्ठानों से पूर्ण नहीं हो रहे हों 3। इस मंत्र के
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इस शाबर प्रयोग का मुख्य प्रयोजन उन असाध्य, अत्यंत जटिल भौतिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक कार्यों की त्वरित सिद्धि है, जो सामान्य मानवीय प्रयासों और वैदिक अनुष्ठानों से पूर्ण नहीं हो रहे हों 3। इस मंत्र के माध्यम से ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसे त्रिदेवों की ब्रह्मांडीय निर्माण, पालन और संहारक ऊर्जाओं को एक बिंदु पर केंद्रित किया जाता है और गुरु गोरखनाथ की अमोघ दुहाई लगाकर उन शक्तियों को साधक की गुप्त मनोकामना पूर्ति हेतु निर्देशित किया जाता है 3। जब तक कार्य सिद्ध न हो जाए, तब तक यह मंत्र-ऊर्जा सूक्ष्म रूप से ब्रह्मांड में अनवरत कार्य करती रहती है। मनोकामना पूर्ण होने के उपरांत साधक द्वारा गुरु गोरखनाथ को मानसिक धन्यवाद ज्ञापित करना इस तांत्रिक चक्र को पूर्ण और संतुलित करता है 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस शाबर प्रयोग का मुख्य प्रयोजन उन असाध्य, अत्यंत जटिल भौतिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक कार्यों की त्वरित सिद्धि है, जो सामान्य मानवीय प्रयासों और वैदिक अनुष्ठानों से पूर्ण नहीं हो रहे हों 3
इस मंत्र के माध्यम से ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसे त्रिदेवों की ब्रह्मांडीय निर्माण, पालन और संहारक ऊर्जाओं को एक बिंदु पर केंद्रित किया जाता है और गुरु गोरखनाथ की अमोघ दुहाई लगाकर उन शक्तियों को साधक की गुप्त मनोकामना पूर्ति हेतु निर्देशित किया जाता है 3
जब तक कार्य सिद्ध न हो जाए, तब तक यह मंत्र-ऊर्जा सूक्ष्म रूप से ब्रह्मांड में अनवरत कार्य करती रहती है
मनोकामना पूर्ण होने के उपरांत साधक द्वारा गुरु गोरखनाथ को मानसिक धन्यवाद ज्ञापित करना इस तांत्रिक चक्र को पूर्ण और संतुलित करता है
जाप विधि
यह गुरु गोरखनाथ परंपरा का एक अत्यंत विशिष्ट, समय-बद्ध और गुप्त शाबर अनुष्ठान है, जिसे मुख्य रूप से मकर संक्रांति या किसी अत्यंत शुभ तांत्रिक पर्व के आस-पास ही संपन्न किया जाता है 3। साधक को मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व (अर्थात 14 जनवरी या तदनुरूप तिथि को) एकांत में बैठकर इस मंत्र की 31 माला का जप पूर्ण करना होता है 3। यदि एक दिन में 31 माला का जप संभव न प्रतीत हो, तो साधक इसे एक दिन पूर्व (शनिवार आदि) प्रारंभ कर सकता है और अधिकांश मालाओं का जप उसी दिन पूर्ण कर संक्रांति की रात्रि तक शेष जप पूर्ण कर सकता है 3। अनुष्ठान की सबसे कठोर शर्त यह है कि जप के दौरान और उसके पश्चात साधक को अपनी अभीष्ट मनोकामना पूर्णतः अपने मन में गुप्त रखनी होती है; इसका मौखिक उच्चारण या किसी अन्य व्यक्ति से साझा करना ऊर्जा के प्रवाह को भंग कर अनुष्ठान को खंडित कर सकता है 3। अनुष्ठान की पूर्णता (उद्यापन) के रूप में संक्रांति के अगले दिन प्रातः काल स्नान के पश्चात तिल से बनी सामग्रियों, गुड़, और कुछ धनराशि को अत्यंत गरीब और निशक्त जनों में गुप्त रूप से दान करना अनिवार्य है 3।
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jap mantraॐ श्रीं गं गणपतये नमः
navgrah mantraजपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥