ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
बगलामुखी (ब्रह्मास्त्र विद्या)

बगलामुखी (ब्रह्मास्त्र विद्या) उग्र मंत्र

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा

शत्रु की वाणी, मुख और पैरों का प्रबल स्तंभन (Paralysis), शत्रु की कुबुद्धि व षड्यंत्र का पूर्ण विनाश 6।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारउग्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

शत्रु की वाणी, मुख और पैरों का प्रबल स्तंभन (Paralysis), शत्रु की कुबुद्धि व षड्यंत्र का पूर्ण विनाश 6।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

शत्रु की वाणी, मुख और पैरों का प्रबल स्तंभन (Paralysis), शत्रु की कुबुद्धि व षड्यंत्र का पूर्ण विनाश

जाप विधि

त्रिशक्ति आह्वान के अंतर्गत तांत्रिक विधि से पीले वस्त्र, पीला आसन व हल्दी की माला का प्रयोग करते हुए गुरु के सानिध्य में जप 6।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

jap mantra

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

kavach mantra

ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34

beej mantra

ग्रां

dhyan mantra

अहं ब्रह्मास्मि

stotra mantra

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।। 28

shanti mantra

ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥