गुरु / बृहस्पति बीज बीज मंत्र
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सांसारिक ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सौभाग्य का तीव्र एवं स्थिर विकास 65।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सांसारिक ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सौभाग्य का तीव्र एवं स्थिर विकास 65।
इस मंत्र से क्या होगा?
सांसारिक ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सौभाग्य का तीव्र एवं स्थिर विकास
जाप विधि
प्रातः काल 108 बार जप 65।
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रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र। दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
ugra mantraॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
sabar mantraऊँ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ की। शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय 13
naam mantraभद्रकाली
dhyan mantraगजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
shanti mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥