गुरु / बृहस्पति बीज बीज मंत्र
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सांसारिक ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सौभाग्य का तीव्र एवं स्थिर विकास 65।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सांसारिक ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सौभाग्य का तीव्र एवं स्थिर विकास 65।
इस मंत्र से क्या होगा?
सांसारिक ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सौभाग्य का तीव्र एवं स्थिर विकास
जाप विधि
प्रातः काल 108 बार जप 65।
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ॐ सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान्नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव । हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
bhakti mantraॐ जय हरि विट्ठल नमो नमः पंढरीनाथा नमो नमः
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
gyan mantraॐ अक्षरेस्वराय विद्महे मन्त्रराजाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात् ॥
stotra mantraसिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ॥ 35
navgrah mantraॐ श्रीं क्रीं ह्रां चं चन्द्राय नमः॥