कालिका (घोर रूपा) उग्र मंत्र
ॐ क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट्
शत्रुओं की गति, वाणी व बुद्धि का पूर्ण स्तंभन (Paralysis of enemies) 40।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शत्रुओं की गति, वाणी व बुद्धि का पूर्ण स्तंभन (Paralysis of enemies) 40।
इस मंत्र से क्या होगा?
शत्रुओं की गति, वाणी व बुद्धि का पूर्ण स्तंभन (Paralysis of enemies)
जाप विधि
चिंतामुक्त होकर पूर्ण आस्था के साथ एकांत में श्रवण व मानसिक जप 40।
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ॐ श्री रामः शरणं मम
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
naam mantraकौशलेंद्र
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