उग्र तारा (त्वरित कार्य सिद्धि) उग्र मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं उग्र तारे तुतारे देवदत्त फट्
जब परिस्थितियां अत्यंत विपरीत हों, शत्रु या तंत्र बाधा से भारी आर्थिक नुकसान हो रहा हो, उसका त्वरित समाधान और नकारात्मक ऊर्जा की शांति 20।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जब परिस्थितियां अत्यंत विपरीत हों, शत्रु या तंत्र बाधा से भारी आर्थिक नुकसान हो रहा हो, उसका त्वरित समाधान और नकारात्मक ऊर्जा की शांति 20।
इस मंत्र से क्या होगा?
जब परिस्थितियां अत्यंत विपरीत हों, शत्रु या तंत्र बाधा से भारी आर्थिक नुकसान हो रहा हो, उसका त्वरित समाधान और नकारात्मक ऊर्जा की शांति
जाप विधि
शक्ति मुद्रा लगाकर आज्ञा चक्र पर ध्यान दें। 10 बार प्राणायाम के बाद लगातार 10 मिनट तक मंगलवार या शनिवार से जाप प्रारंभ करें 20।
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नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
jap mantraॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
beej mantraभ्रं
dhyan mantraशान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
shanti mantraॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
stotra mantraस्वयम्भूः शम्भुरादित्यः पुष्कराक्षो महास्वनः । अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरुत्तमः॥ 12