युगल स्वरूप श्री सीता-राम भक्ति मंत्र
सीता राम सीता राम जय जय सीता राम
सीता-राम नाम का यह जप मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों (इड़ा और पिंगला नाड़ियों) में संतुलन लाता है, मन को शांत कर अनिद्रा जैसी समस्याओं को दूर करता है, और युगल सरकार के चरणों में निष्काम भक्ति व शुद्ध प
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सीता-राम नाम का यह जप मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों (इड़ा और पिंगला नाड़ियों) में संतुलन लाता है, मन को शांत कर अनिद्रा जैसी समस्याओं को दूर करता है, और युगल सरकार के चरणों में निष्काम भक्ति व शुद्ध प्रेम प्रदान करता है 39।
इस मंत्र से क्या होगा?
सीता-राम नाम का यह जप मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों (इड़ा और पिंगला नाड़ियों) में संतुलन लाता है, मन को शांत कर अनिद्रा जैसी समस्याओं को दूर करता है, और युगल सरकार के चरणों में निष्काम भक्ति व शुद्ध प्रेम प्रदान करता है
जाप विधि
रामानंदी संप्रदाय एवं अन्य वैष्णव परंपराओं में इस युगल नाम-मंत्र को बिना किसी जटिल कर्मकांड के पूर्ण भक्ति भाव से जपा जाता है 16। माथे पर ऊर्ध्व पुण्ड्र तिलक धारण कर, इसे कीर्तन के रूप में सामूहिक रूप से या व्यक्तिगत स्तर पर श्वास के साथ (मानसिक जप) निरंतर स्मरण करना चाहिए 40।
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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धनं मे देहि दास्योः स्वाहा।
gyan mantraआ मां मेधा सुरभिर्विश्वरुपा हिरण्यवर्णा जगती जगम्या । ऊर्जस्वती पयसा पिन्वमाना सा मां मेधा सुप्रतीका जुषन्ताम् ॥
mool mantraॐ नमो भगवते रूद्राय
jap mantraॐ कालभैरवाय नमः
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
dhyan mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥