ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान श्री हनुमान

भगवान श्री हनुमान भक्ति मंत्र

ॐ श्री हनुमते नमः

जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मकता, भय और संकटों का समूल नाश करना 41। यह मंत्र साधक के भीतर आत्मिक शक्ति का संचार करता है और श्री राम के प्रति हनुमान जी जैसी ही अनन्य सेवा-भक्ति और समर्पण जागृत करता है

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारभक्ति मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मकता, भय और संकटों का समूल नाश करना 41। यह मंत्र साधक के भीतर आत्मिक शक्ति का संचार करता है और श्री राम के प्रति हनुमान जी जैसी ही अनन्य सेवा-भक्ति और समर्पण जागृत करता है 53।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मकता, भय और संकटों का समूल नाश करना 41

02

यह मंत्र साधक के भीतर आत्मिक शक्ति का संचार करता है और श्री राम के प्रति हनुमान जी जैसी ही अनन्य सेवा-भक्ति और समर्पण जागृत करता है

जाप विधि

इस मंत्र का जप तुलसी या रुद्राक्ष की माला से मंगलवार या शनिवार को विशेष रूप से किया जाता है 41। साधक को पूर्ण ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार और पवित्र आचरण का पालन करते हुए, श्री राम के परम भक्त हनुमान जी के दास भाव का स्मरण कर जप करना चाहिए 59।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

beej mantra

बं, भं, मं, यं, लं, रं

kavach mantra

स्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14

jap mantra

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

shanti mantra

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

stotra mantra

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च। नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने॥ तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च । 43

dhyan mantra

ॐ