पिशाच एवं दुष्ट दृष्टि निवारण (लोक तांत्रिक प्रयोग) शाबर मंत्र
ओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27
इस तांत्रिक लोक-प्रयोग का प्रयोजन किसी ईर्ष्यालु व्यक्ति की अत्यंत दुष्ट दृष्टि, भूत-प्रेत की सूक्ष्म अतीन्द्रिय बाधा और पिशाच श्रेणी की नीच ऊर्जाओं का त्वरित विनाश करना है 27। तांत्रिक विज्ञान में नम
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इस तांत्रिक लोक-प्रयोग का प्रयोजन किसी ईर्ष्यालु व्यक्ति की अत्यंत दुष्ट दृष्टि, भूत-प्रेत की सूक्ष्म अतीन्द्रिय बाधा और पिशाच श्रेणी की नीच ऊर्जाओं का त्वरित विनाश करना है 27। तांत्रिक विज्ञान में नमक को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का सबसे बड़ा प्राकृतिक क्रिस्टल माना जाता है। जब इस मंत्र की 'क्लीम' (आकर्षण और संहार का मिश्रित नाद) ऊर्जा उस नमक में प्रवाहित होती है, तो वह क्रिस्टल पीड़ित के आभामंडल से संपूर्ण 'दुष्ट दृष्टि' और पिशाच ऊर्जा को स्पंज की भांति खींच कर अपने अंदर समाहित कर लेता है। तदुपरांत उसे घर से बाहर फेंक कर उस दोष को हमेशा के लिए नष्ट कर दिया जाता है 27।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस तांत्रिक लोक-प्रयोग का प्रयोजन किसी ईर्ष्यालु व्यक्ति की अत्यंत दुष्ट दृष्टि, भूत-प्रेत की सूक्ष्म अतीन्द्रिय बाधा और पिशाच श्रेणी की नीच ऊर्जाओं का त्वरित विनाश करना है 27
तांत्रिक विज्ञान में नमक को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का सबसे बड़ा प्राकृतिक क्रिस्टल माना जाता है
जब इस मंत्र की 'क्लीम' (आकर्षण और संहार का मिश्रित नाद) ऊर्जा उस नमक में प्रवाहित होती है, तो वह क्रिस्टल पीड़ित के आभामंडल से संपूर्ण 'दुष्ट दृष्टि' और पिशाच ऊर्जा को स्पंज की भांति खींच कर अपने अंदर समाहित कर लेता है
तदुपरांत उसे घर से बाहर फेंक कर उस दोष को हमेशा के लिए नष्ट कर दिया जाता है
जाप विधि
यह नजर दोष और सूक्ष्म पिशाच बाधा को जड़ से दूर करने का एक अत्यंत सशक्त और अनुभूत लोक-तांत्रिक प्रयोग है 27। साधक को अपने दाहिने हाथ में एक चुटकी भर खड़ा (साबुत/समुद्री) नमक लेना होता है। इसके पश्चात, उस नमक को पीड़ित व्यक्ति के सिर के ऊपर से दक्षिणावर्त दिशा में (Clockwise - घड़ी की सुई की दिशा में) तीन या सात बार घुमाया जाता है (इस क्रिया को 'उसारना' कहते हैं)। घुमाते समय इस मंत्र का जोर से वाचिक जप या पूर्ण एकाग्रता के साथ मानसिक जप किया जाता है 27। यदि साधक स्वयं इस दोष से पीड़ित है और कोई अन्य व्यक्ति सहायता हेतु उपस्थित नहीं है, तो वह स्वयं अपने दाहिने हाथ में नमक लेकर अपने ही सिर के ऊपर से तीन बार घुमा कर यह क्रिया संपन्न कर सकता है 27। प्रक्रिया पूर्ण होने के ठीक उपरांत उस नकारात्मकता-युक्त नमक को घर के बाहर किसी निर्जन स्थान पर फेंक देना चाहिए अथवा प्रवाहित जल या सिंक में बहा देना चाहिए 27।
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