शिव-शक्ति एवं गुरु गोरखनाथ आवाहन शाबर मंत्र
ओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1
इस मंत्र का केंद्रीय प्रयोजन ब्रह्मांड की किसी भी विशिष्ट ऊर्जा, देवी, या देवता का प्रत्यक्ष आवाहन कर उन्हें साधक के संकल्प के अनुकूल कार्य करने हेतु बाध्य करना है 1। तांत्रिक विज्ञान में, जब कोई देव
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इस मंत्र का केंद्रीय प्रयोजन ब्रह्मांड की किसी भी विशिष्ट ऊर्जा, देवी, या देवता का प्रत्यक्ष आवाहन कर उन्हें साधक के संकल्प के अनुकूल कार्य करने हेतु बाध्य करना है 1। तांत्रिक विज्ञान में, जब कोई देव शक्ति सहज प्रार्थनाओं से प्रसन्न या जाग्रत नहीं होती, तब यह मंत्र एक 'आध्यात्मिक उत्प्रेरक' (Spiritual Catalyst) की भांति कार्य करता है। इसमें भगवान शिव, माता काली और गुरु गोरखनाथ की 'दुहाई' (कठोर आध्यात्मिक शपथ) दी जाती है 1। यह दुहाई ब्रह्मांडीय शक्तियों पर एक नैतिक और तांत्रिक दबाव उत्पन्न करती है, जिससे लक्षित शक्ति साधक के समक्ष प्रकट होने या उसके रुके हुए कार्यों को पूर्ण करने के लिए विवश हो जाती है। यह त्वरित प्रभाव उत्पन्न करने वाली प्रणाली है जो अटके हुए बड़े तांत्रिक अनुष्ठानों में प्राण-प्रतिष्ठा करती है और अतीन्द्रिय बाधाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त करती है 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस मंत्र का केंद्रीय प्रयोजन ब्रह्मांड की किसी भी विशिष्ट ऊर्जा, देवी, या देवता का प्रत्यक्ष आवाहन कर उन्हें साधक के संकल्प के अनुकूल कार्य करने हेतु बाध्य करना है 1
तांत्रिक विज्ञान में, जब कोई देव शक्ति सहज प्रार्थनाओं से प्रसन्न या जाग्रत नहीं होती, तब यह मंत्र एक 'आध्यात्मिक उत्प्रेरक' (Spiritual Catalyst) की भांति कार्य करता है
इसमें भगवान शिव, माता काली और गुरु गोरखनाथ की 'दुहाई' (कठोर आध्यात्मिक शपथ) दी जाती है 1
यह दुहाई ब्रह्मांडीय शक्तियों पर एक नैतिक और तांत्रिक दबाव उत्पन्न करती है, जिससे लक्षित शक्ति साधक के समक्ष प्रकट होने या उसके रुके हुए कार्यों को पूर्ण करने के लिए विवश हो जाती है
जाप विधि
इस अमोघ शाबर मंत्र की साधना मुख्य रूप से तांत्रिक आवाहन और अतीन्द्रिय शक्तियों के प्रकटीकरण हेतु की जाती है। लोक-साधना के प्रामाणिक ग्रंथों के अनुसार, इस अनुष्ठान को साधक अपनी आध्यात्मिक क्षमता और ऊर्जा के स्तर के आधार पर एक-दिवसीय त्वरित सिद्धि अथवा ग्यारह-दिवसीय क्रमिक अनुष्ठान के रूप में संपन्न कर सकता है 1। एक-दिवसीय सिद्धि प्रक्रिया अत्यंत कठोर होती है, जिसमें साधक को संपूर्ण रात्रि निद्रा का त्याग कर, एक स्थिर आसन पर बैठकर, अखंड दीपक के समक्ष निरंतर इस मंत्र का सहस्रों बार जप करना होता है 1। ग्यारह-दिवसीय अनुष्ठान में प्रतिदिन एक निश्चित समय और निश्चित संख्या में जप किया जाता है। जप के समय पूर्ण सात्विकता, शारीरिक पवित्रता और मानसिक एकाग्रता (ब्रह्मचर्य) का पालन अनिवार्य है। इस मंत्र की सबसे महत्त्वपूर्ण तकनीकी आवश्यकता यह है कि जप करते समय 'अमुक देव' के स्थान पर उस विशिष्ट अतीन्द्रिय शक्ति, देवी, या देवता के नाम का स्पष्ट और त्रुटिहीन उच्चारण किया जाना चाहिए, जिसे साधक अपने अनुकूल बनाना चाहता है 1। अनुष्ठान के चरण आवश्यक मापदंड अवधि विकल्प 1 दिन (अखंड रात्रि जप) अथवा 11 दिन (नियमित संकल्प) 1 अनिवार्य नियम पूर्ण सात्विकता, ब्रह्मचर्य, अखंड दीपक, स्थिर आसन 1 तकनीकी स्थानापन्न 'अमुक देव' के स्थान पर इष्ट शक्ति का स्पष्ट नामोच्चारण 1
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कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
beej mantraधूं
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
kaamya mantraअच्युतानन्त गोविन्द नामोच्चारणभेषजात्। नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्॥
gyan mantraसदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥
jap mantraॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशानुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा