भगवान श्री कार्तिकेय (सुब्रमण्यम) भक्ति मंत्र
ॐ श्री शरवणभवाय नमः
जीवन से नकारात्मकता और आंतरिक शत्रुओं (जैसे क्रोध, मोह) का शमन करना, साहस और आध्यात्मिक तेज की प्राप्ति, तथा भगवान शिव के पुत्र सुब्रमण्यम के प्रति शुद्ध भक्ति उत्पन्न करना 45।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
जीवन से नकारात्मकता और आंतरिक शत्रुओं (जैसे क्रोध, मोह) का शमन करना, साहस और आध्यात्मिक तेज की प्राप्ति, तथा भगवान शिव के पुत्र सुब्रमण्यम के प्रति शुद्ध भक्ति उत्पन्न करना 45।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन से नकारात्मकता और आंतरिक शत्रुओं (जैसे क्रोध, मोह) का शमन करना, साहस और आध्यात्मिक तेज की प्राप्ति, तथा भगवान शिव के पुत्र सुब्रमण्यम के प्रति शुद्ध भक्ति उत्पन्न करना
जाप विधि
इस षडाक्षर मंत्र का जप प्रातः काल स्नानादि के पश्चात, पूर्व दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष की माला पर १०८ बार किया जाना चाहिए 45। जप करते समय भगवान कार्तिकेय के तेजस्वी स्वरूप का ध्यान करना उत्तम है।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ भ्रं भैरवाय नमः
ugra mantraॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा
jap mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां सर्वविद्यां देहि दापय स्वाहा
siddh mantraॐ कं कामवशितायै नमः स्वाहा ।
tantrik mantraॐ नमो भगवते महानृसिंहाय सिंहाय सिंहमुखाय विकटाय वज्रनखाय मां रक्ष रक्ष ममशरीरं नखशिखापर्यन्तं रक्ष रक्ष कुरु कुरु मदीयं शरीरं वज्राङ्गम् कुरु कुरु परयन्त्र परमन्त्र परतन्त्राणां क्षिणु क्षिणु स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा
navgrah mantraॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्। अपां रेतां सि जिन्वति।।