भगवान श्री गणेश भक्ति मंत्र
ॐ श्री गणपतये नमः
आध्यात्मिक मार्ग और सांसारिक जीवन में आने वाले सभी विघ्नों का समूल नाश कर मन में स्थिरता स्थापित करना, तथा भगवान शिव एवं गणेश के प्रति आरंभिक भक्ति व आत्मबल प्राप्त करना 41।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
आध्यात्मिक मार्ग और सांसारिक जीवन में आने वाले सभी विघ्नों का समूल नाश कर मन में स्थिरता स्थापित करना, तथा भगवान शिव एवं गणेश के प्रति आरंभिक भक्ति व आत्मबल प्राप्त करना 41।
इस मंत्र से क्या होगा?
आध्यात्मिक मार्ग और सांसारिक जीवन में आने वाले सभी विघ्नों का समूल नाश कर मन में स्थिरता स्थापित करना, तथा भगवान शिव एवं गणेश के प्रति आरंभिक भक्ति व आत्मबल प्राप्त करना
जाप विधि
किसी भी नई आध्यात्मिक साधना या दिन के प्रारंभ में इस नाम-मंत्र का वाचिक या मानसिक जप किया जाता है 45। रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूर्ण एकाग्रता के साथ १०८ बार जप करना चाहिए 1।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
kaamya mantraस्ह्क्ल्रीं हं॥
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
mool mantraॐ कूर्माय नमः
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
vaidik mantraॐ वाङ् म आस्येऽस्तु। ॐ नसोर्मे प्राणोऽस्तु। ॐ अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु। ॐ कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। ॐ बाह्वोर्मे बलमस्तु। ॐ ऊर्वोर्मे ओजोऽस्तु। ॐ अरिष्टानि मेऽङ्गानि तनूस्तन्वा मे सह सन्तु॥